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Gurudev Ojaswi Sharma Ji

Gurudev Ojaswi Sharma Ji

著者: Seeker_Who Am I
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This Podcast is a tribute to our most respected Gurudev Shri Ojaswi Sharma ji and his teaching. All material on this podcast has been adapted by seekers from original recordings of Satsangs and letters of Gurudev Shri Ojaswi Sharma. Gurudev himself has never been interested in publishing any of his talks or in publicity of any kind. However, his seekers feel the need to preserve his wisdom for themselves and others. Many questions that arise concerning the spiritual path are common to all seekers. For this reason Gurudev's talks on these topics may be an inspiration to many people.Seeker_Who Am I スピリチュアリティ
エピソード
  • Spiritual Path : Emotions and Intellect
    2026/06/26

    Spiritual Path : Emotions and Intellect

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    8 分
  • ।। दैनिक साधना का महत्व ।।
    2026/06/26


    * जो व्यक्ति दूसरे का जितना ध्यान जीवन में रख कर चलता है, वो उतना ही भगवान के निकट होता है


    * धर्म के दस लक्षण मनु स्मृति में


    * पहला लक्षण - धैर्य


    * दूसरा - क्षमा


    * तीसरा - दम


    * चौथा - आस्ते ( चोरी न करना )


    * पांचवा - शौंच


    * छठा - इंद्रियों को वश में रखना


    * सातवां - सात्विक बुद्धि


    * आठवां - सात्विक ज्ञान


    * नौवा - सत्य वचन


    * दसवां - क्रोध न करना


    * सच्चा साधक २४ घंटे का _ हर समय अपने ऊपर निगाह


    * वही काम करते हुए नीयत बदलनी है


    * सांसारिक जीवन और आध्यात्मिक जीवन में कोई भेद नहीं


    * ऐसा नहीं है कि साधक को जीवन में ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है


    * अनंत जन्मों का मैल निकलता है


    * इस संसार में पतन होने की चेष्टा करने की आवश्यकता नहीं है। पतन तो होगा , यदि उत्थान की चेष्टा नहीं करी तो


    * इस लिए रोज ध्यान रोज भजन, जो साधना है रोज करे जाओ


    * तुम फंस गये, अब भाग नहीं सकते


    * आत्मा क्या है? इसको समझने की कोशिश मत करो, तुम्हें समझ में आयेगा नहीं। बस मान लो


    * अनंत आत्मा के महा-सागर में लहरें उठ रही है। लहर का अलग होने का भ्रम मुश्य शरीर में आकर ही खत्म होता है

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    35 分
  • ।। सब के गुरु परमात्मा।|
    2026/06/22

    * सिद्धियों में मत फंस जाना, केवल परमात्मा


    * इस देश की और संस्कृति की कोई सीमा नहीं है, हर क्षेत्र में हमारे पूर्वजों ने अनेक प्रयोग किये


    * जिस मार्ग पर चल पड़े फिर उसको पूरा आखिर तक चलो


    * निषेधात्मक मार्ग से अनुभव होता है, पर इस झंझट में मत पड़ो

    .

    10 minute meditation

    .

    * सभी इच्छाओं का अंत दुख में होता है


    * यदि कोई इच्छा उत्पन्न हो जाए तो उसे दृष्टा भाव से देखो


    * तुम हो, मैं हु और तुम्हारे चरणों में हु


    * तुम पक्का रखो के ये आखरी जनम है

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    33 分
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