エピソード

  • क्या प्रयत्न से उत्कट अभिलाषा (भगवत्प्राप्ति के लिए) जागृत हो सकती है ?
    2026/04/17

    *अंदर की बेचैनी के कारण भगवान की तरफ चलना मजबूरी है


    * ' हे मेरे नाथ मैं आपको भूलू नहीं '

    * ' हे नाथ अपना प्रेम दो '


    * मनुष्य जीवन कल्पवृक्ष की तरह है


    * उत्कट अभिलाषा शराब पीने से खत्म हो जाती है


    * Mobile से सुविधा, परन्तु इस से बेचैनी भी बढ़ी


    * कलयुग की विशेषता, थोड़ा भी चलोगे, भगवान जल्दी मिलेंगे


    * अपने आध्यात्मिक अनुभवों को किसी से share मत करो


    * कर्तव्य से जो समय बचे , इस ही में लगाओ

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    31 分
  • 'व्यवहारिक' अध्यात्म
    2026/04/11

    * आत्मज्ञान व्यक्तिगत होता है


    * समाज को कोई नहीं बदल सकता


    * परिस्थिति, मनःस्थिति


    * आर्मी का गुरुदेव का व्यक्तिगत किस्सा

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    38 分
  • भगवान से संबंध जोड़ो
    2026/04/10

    * आदि शंकराचार्य जी


    * राधा कृष्ण


    * भगवान से कोई भी संबंध जोड़ लो


    * इस मार्ग में लाभ ही लाभ

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    22 分
  • । प्रेम ।
    2026/04/07

    * भगवान हमसे दूर नहीं है


    * इस ही जन्म में भगवत प्राप्ति का पक्का इरादा रखो


    * अध्यात्म में कभी भी खुद को दूसरे से compare नहीं करना


    * ना मैं किसी का कभी गुरु बना, ना कोई है संप्रदाय


    * हर चीज का सार है प्रेम

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    33 分
  • "मन की झंझट"
    2026/04/01

    "मन की झंझट"

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    9 分
  • "भावपूर्ण कीर्तन की महिमा"
    2026/03/31

    संसार से अभिमुख होकर भाव से भगवान में जुड़ने की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है|

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    13 分
  • 'सत्संग' को जीवन में लाओ !
    2026/03/31

    * सत्संग में मोबाइल बंद रखना चाहिए क्योंकि यहां पर जो रूपांतरण हो सकता है उससे ज्यादा जरूरी संसार में कोई खबर नहीं हो सकती


    * सैद्धांतिक प्रश्नों का उत्तर और भगवत प्राप्ति दोनों अलग-अलग बात


    * सत्संग की बातों को आत्मसर करके अपने जीवन में उतारे और अपना पक्का वाला काम कर लो


    * आज्ञा के कारण आखरी सांस को मौत कहते हैं मौत तो चली रही है वह एक process है


    * जितने अंश में सच्चे हृदय से भगवान को मान लिया जाता है वे अपना रहस्य प्रकट करने लग जाते हैं

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    16 分
  • भगवत प्राप्ति जल्दी कैसे हो ?
    2026/03/30

    * भगवान अभी यही मेरे साथ है, यह विश्वास के साथ भजन कीर्तन, साधना करना आरंभ कर दो


    * भगवान को कोई खो नहीं नहीं सकता


    * सत्य चित आनंद


    * जब तक तुमने खुद को शरीर मन रखा है तब तक आनंद होगा नहीं


    * भगवत प्राप्ति के अनुभव में रुकावट हमने लगाई हुई है


    * उसके लिए लालसा नहीं है बस बातें बातें होती हैं


    * भगवान ही होते हैं प्रेम का स्रोत


    * संसार रूप में भगवान है और भगवान का हम काम कर रहे हैं लगन से


    * भगवत प्राप्ति तब भी हो सकती है जब सारे संकल्प खत्म हो जाए


    * असली वाला प्रेम भगवान देते हैं

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    36 分